ऑनलाइन गेम की लत से केवल बच्चे ही नहीं, नवयुवक भी प्रभावित हो रहे हैं. वे अपनी पढ़ाई तक छोड़ देते हैंकुछ बच्चे तो रात में नींद लेने के बजाय दो-तीन बजे तक गेम खेलने में ही लगे रहते हैं,15-20 घंटे मोबाइल व इंटरनेट पर गुजारने के कारण उनकी जीवनशैली बिगड़ रही है उनकी आखों पर इसका प्रभाव पड़ रहा है. खाने-पीने तक का उन्हें ध्यान नहीं रहता कुछ बच्चे तो खाना खाते समय भी मोबाइल पर वीडियो देख रहे होते हैं,नींद पूरी नहीं होने से कई बच्चे धीरे-धीरे मानसिक तनाव व अवसाद से पीड़ित हो जाते हैं.जिसका उन्हें पता नहीं चलता,लत लगने के बाद यदि उन्हें ऑनलाइन गेम या वीडियो देखने से मना किया जाए तो उनमें चिड़चिड़ापन होने लगता है और वे आक्रामक हो जाते हैं,मोबाइल के बिना उन्हें घबराहट और बेचैनी होने लगती है.कई माता-पिता को पता ही नहीं चलता कि यह ऑनलाइन गेम की लत का परिणाम है,समस्या यह है कि शुरुआत में माता-पिता भी ध्यान नहीं रखते.उन्हें तब मालूम चलता है जब समस्या बढ़ चुकी होती है.
दोस्तों आज हम आप को ऐसी ही के घटना के बारे में बताने जा रहे है जिसे पढ़ कर आप शायद कुछ सबक ले सके, यह घटना जिले के सागर रोड स्थित एक कॉलोनी की है, जहां विवेक पांडेय अपनी पत्नी प्रीति पांडेय बेटे कृष्णा और बेटी के साथ रहते हैं. विवेक पैथालॉजी संचालक हैं, जबकि प्रीति जिला अस्पताल में कार्यरत हैं. मामला शुक्रवार का है, जब बेटा कृष्णा और उसकी बहन घर पर अकेले थे. इसी दौरान मां को मोबाइल पर खाते से 1500 रुपए कटने का मैसेज आया. जिसके बाद प्रीति ने घर पर बेटे कृष्णा को फोन कर पैसे कटने की वजह पूछी. जिस पर कृष्णा डर गया और कहा कि ये पैसे ऑनलाइन गेम की वजह से कटे हैं. इस बात पर मां गुस्सा हो गईं और फोन पर ही कृष्णा को डांट दिया.
मां से बात करने के बाद कृष्णा अपने कमरे में चला गया और रूम अंदर से लॉक कर दिया. इस दौरान घर पर केवल कृष्णा की बहन थी. थोड़ी देर बाद जब कृष्णा की बड़ी बहन जब उसके कमरे में गई तो काफी देर दरवाजा खटखटाने के बाद भी दरवाजा नहीं खुला. इसके बाद बहन ने तुरंत अपने मम्मी-पापा को फोन कर बताया. इस बात का पता लगते ही माता-पिता तुरंत घर पहुंचे और उन्होंने जब दरवाजा तोड़कर देखा, तो अंदर कृष्णा फंदे पर लटका हुआ था.
अबतक गंवाए 40 हजार रुपए-
कृष्णा ने एक सुसाइड नोट भी लिखा था. जिसमें लिखा था कि उसने फ्री फायर गेम के चक्कर में अबतक करीब 40 हजार रुपए गंवाए हैं. नोट में साथ ही लिखा था कि आई एम सॉरी मां, डोंट क्राइ. वहीं बेटे की मौत से मां को रो-रो कर बुरा हाल है.
मोबाइल के साथ में घंटो रहकर बच्चे उस पर निर्भर हो जाते हैं.वे मन पर काबू नहीं रख पाते। बस हर पल गेम खेलते रहना चाहते हैं. इस वजह से पढ़ाई में भी उनका मन नहीं लगता.कई ऑनलाइन गेम ऐसे हैं, जो बच्चों को आक्रामक बना रहे हैं.उससे आपराधिक प्रवृत्ति बढ़ती है. लेकिन कुछ गेम ऐसे भी हैं जो बच्चों में गणना करने की क्षमता बढ़ाते हैं। दिमाग, हाथ व आंख के साथ संतुलन क्षमता बढ़ाती है.ऐसे गेम मानसिक स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक नहीं होते. यदि ऐसा हुआ तो यह ऑनलाइन गेम की लत की एक शुरुआत हो सकती है,जो आगे चलकर एक बीमारी बन जाती है, इसलिए समय का ध्यान रखना जरूरी है. दूसरी बात यह है कि बच्चों को बड़ों की निगरानी में ही मोबाइल का इस्तेमाल करने देना चाहिए.बच्चों को तकनीक से दूर नहीं करना चाहिए लेकिन उसका इस्तेमाल सतर्कता के साथ होना चाहिए.
Tags:
Breaking news


